बकरी पालन व्यवसाय कैसे शुरू करें बकरी पालन व्यवसाय योजना कैसे शुरू करें हिंदी में

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बकरी पालन व्यवसाय योजना कैसे शुरू करें हिंदी में (How to Start Goat Farming Business in India in Hindi):

बकरी पालन व्यवसाय एक लाभदायक व्यवसाय है। इस बिजनेस से काफी मुनाफा कमाया जा सकता है। बकरी पालन खेती के साथ-साथ बहुत ही आसानी से किया जा सकता है। कई किसान ऐसे हैं जो कृषि कार्य के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं। कोई भी इस फॉर्म को कुछ सरल प्रक्रियाओं की मदद से शुरू कर सकता है और पैसे कमा सकता है। यहां बकरी पालन से जुड़ी जरूरी जानकारी बताई जा रही है।

बकरी पालन की बात करें तो आदिकाल से ही मनुष्य जाति सामाजिक और आर्थिक प्रयोजन के लिए बकरी पाल रही है। कहने का अभिप्राय यह है की अपनी कमाई के लिए जिन पशुओं का पालन किया जाता है, उनमें से बकरी भी एक पशु है । एक आंकड़े के मुताबिक हमारे देश भारतवर्ष में बकरियों की संख्या कुल पशुओं की संख्या का 25.6% बकरी है । जिसका मतलब यह है की भारत में बकरी पालन से अधिक से अधिक लोग जुड़े हुए हैं ।

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बकरी की नस्लों की सूची:

हमारे देश में विभिन्न नस्लों की बकरियां पाई जाती हैं, उनके नाम नीचे दिए जा रहे हैं। आप इनमें से किसी भी बकरी की नस्ल की मदद से अपना बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

  • उस्मानाबादी बकरी: बकरी की इस नस्ल का उपयोग दूध और मांस दोनों के लिए किया जाता है। इस नस्ल की बकरी महाराष्ट्र में पाई जाती है। आमतौर पर इस नस्ल की बकरियां साल में दो बार प्रजनन करती हैं। इस प्रजनन प्रक्रिया के दौरान जुड़वां या तीन (एक साथ तीन) भी प्राप्त किए जा सकते हैं। तत्काल समय में उस्मानाबादी बकरी की कीमत 260 रुपये प्रति किलो और बकरी की कीमत 300 रुपये प्रति किलो है।
  • जमुनापारी बकरी: जमुनापारी नस्ल की बकरियां दूध के मामले में काफी बेहतर होती हैं। इस नस्ल की बकरी अन्य नस्ल की बकरियों से बेहतर दूध देती है। यह उत्तर प्रदेश की एक नस्ल है। बकरी की इस नस्ल का प्रजनन साल में एक बार ही होता है। साथ ही इस बकरी से जुड़वा बच्चों के पैदा होने की संभावना बहुत कम होती है। इस नस्ल के बकरे की कीमत 300 रुपये प्रति किलो और बकरी की कीमत 400 रुपये प्रति किलो है।
  • बीटल बकरी: इस नस्ल की बकरी पंजाब और हरियाणा में पाई जाती है। जमुनापारी के बाद दूध देने के मामले में यह बकरी बहुत अच्छी होती है। इसलिए इसका उपयोग दूध के लिए किया जाता है। हालांकि, बकरी की इस नस्ल से जुड़वा बच्चों के पैदा होने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक होती है। इस नस्ल के बकरे की कीमत 200 रुपये प्रति किलो और बकरी की कीमत 250 रुपये प्रति किलो है।
  • शिरोई बकरी: बकरी की इस नस्ल का उपयोग दूध और मांस दोनों प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह राजस्थानी नस्ल है। आमतौर पर इस नस्ल की बकरियां साल में दो बार प्रजनन गतिविधि करती हैं। इस नस्ल के बकरे में जुड़वा बच्चों की अपेक्षा कम होती है। इस नस्ल के बकरे की कीमत 325 रुपये प्रति किलो और बकरी की कीमत 400 रुपये प्रति किलो है।
  • अफ्रीकी बोर: इस नस्ल की बकरी का उपयोग मांस प्राप्त करने के लिए किया जाता है। बकरी की इस नस्ल की खास बात यह है कि इसका वजन कम समय में काफी बढ़ जाता है इसलिए इससे ज्यादा लाभ मिलता है। साथ ही, इस नस्ल की बकरियां अक्सर जुड़वां बच्चे पैदा करती हैं। इसी वजह से बाजार में अफ्रीकन बोर बकरियों की मांग काफी ज्यादा है। इस नस्ल के बकरे की कीमत 350 रुपये प्रति किलो से लेकर 1,500 रुपये प्रति किलो और बकरियों की कीमत 700 रुपये प्रति किलो से लेकर 3,500 रुपये प्रति किलो तक है।

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भारत में बकरी पालन का महत्व (Importance of Goat Farming in India):

जैसा की हम सबको विदित है की भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसकी अधिकतर जनसँख्या ग्रामीण भारत में निवास करती है। और सच्चाई यह है की ग्रामीण भारत में भूमिहीन एवं छोटे किसानों का बकरी पालन नामक यह व्यापार आजीविका कमाने का मुख्य स्रोत है। इस व्यापार से मांस के अलावा अन्य उत्पाद जैसे चमड़े, पश्मीना, खाद इत्यादि भी उत्पादित होता है जिससे प्रतिवर्ष देश की हजारों करोड़ आमदनी होती है। इसके अतिरिक्त एक आंकड़े के मुताबिक भारत में प्रति वर्ष लगभग 4.2% ग्रामीण रोजगार बकरी पालन से तैयार होता है ।

हमारे देश में करोड़ों भूमिहीन या निर्बल परिवार बकरी पालन व्यवसाय से विशेष रूप से जुड़े हुए हैं । बकरियों के उत्पाद का अधिकांश (95%) प्रयोग स्थानीय रूप से किया जाता है । इनकी बिक्री के लिए विशेष बाजार तथा निर्यात करने के उपायों की कमी है । इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने पर यह अर्थकर जीविका बन सकती है ।

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बकरी पालन के लिए आवश्यक स्थान:

बकरी पालन के लिए एक व्यवस्थित स्थान की आवश्यकता होती है। इस कार्य के लिए स्थान का चयन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें।

  • स्थान का चयनसबसे पहले बकरी पालन के लिए ऐसी जगह का चयन करें, जो शहर के बाहर यानी ग्रामीण क्षेत्र में हो। ऐसे स्थानों पर बकरियां शहर के प्रदूषण और अनावश्यक शोर से सुरक्षित रहेंगी।
  • शेड निर्माण: बकरी पालन के लिए आपको चुनी हुई जगह पर शेड बनाना होगा। शेड का निर्माण करते समय उसकी ऊंचाई कम से कम 10 फीट रखें। शेड का निर्माण इस प्रकार करें कि हवा आसानी से आ सके।
  • बकरियों की संख्याबकरी पालन के लिए बकरियों की कम से कम एक यूनिट होनी चाहिए। ध्यान रहे कि सभी बकरियां एक ही नस्ल की हों।
  • पेय जल: बकरियों को शीतल पेयजल उपलब्ध कराएं। यह सुविधा शेड के अंदर स्थायी रूप से बनाई जा सकती है।
  • स्वच्छता: बकरियों के आसपास के स्थानों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। उनके मल और मूत्र की साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है।
  • बकरियों की संख्या का नियंत्रण: शेड में उतनी ही बकरियां रखें जितनी आसानी से पाल सकें। यहां बकरियों की भीड़ न बढ़ाएं।

स्थान आवश्यक:

यदि एक बकरी के लिए कुल 20 वर्ग फुट की जगह का चयन किया जाता है, तो कुल 50 बकरियों के लिए आवश्यक जगह 1000 वर्ग फुट
दो बकरियों के लिए जरूरी जगह 40 वर्ग फुट
100 मेमनों के लिए जगह चाहिए 500 वर्ग फुट
कुल जगह की आवश्यकता 1540 वर्ग फुट

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सामान्य बकरी रोग और उपचार:

पाले हुए बकरियों को कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इनसे होने वाली प्रमुख बीमारियों का वर्णन नीचे किया जा रहा है, जिससे इन बकरियों को बचाने की आवश्यकता है। इन बीमारियों को रोकने के लिए टीकाकरण का उपयोग किया जाता है।

  • पैर और मुंह रोग (एफएमडी)बकरियों में अक्सर पैर और मुंह से संबंधित रोग पाए जाते हैं। वैक्सीन की मदद से इस बीमारी से बचा जा सकता है। इस बीमारी का टीका 3 से 4 महीने की उम्र में बकरियों को दिया जाता है। इस टीके के चार महीने बाद बूस्टर की जरूरत होती है। यह टीका हर छह महीने में दोहराया जाता है।
  • प्लेग हो गया (पीपीआर)बकरियों के लिए प्लेग एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी से बड़ी संख्या में बकरियां मर सकती हैं। हालांकि वैक्सीन की मदद से इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। बकरियों को इस बीमारी से बचाने के लिए पहला टीका चार महीने की उम्र में दिया जाता है। इसके बाद चार साल के अंतराल पर यह टीका बकरियों को देना चाहिए।
  • चेचक हो गया: बकरी का चेचक भी एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। बकरियों को इस बीमारी से बचाने के लिए पहली बार तीन से पांच महीने की उम्र में बकरियों का टीकाकरण कराना जरूरी है। यह टीका हर साल बकरियों को देने की जरूरत है।
  • रक्तस्रावी सेप्टीसीमिया (एचएस): हालांकि यह कोई बड़ी बीमारी नहीं है, फिर भी यह बकरियों को काफी नुकसान पहुंचाती है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए पहला टीका बकरी के जन्म के 3 से 6 महीने के बीच दिया जाना है। इसके बाद यह टीका हर साल देना होता है। यह टीका मानसून से पहले देने की सलाह दी जाती है।
  • बिसहरियायह एक जानलेवा बीमारी है, जो एक जानवर से दूसरे इंसान में भी फैल सकती है। इसलिए इस बीमारी से बचाव जरूरी है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए बकरी का पहला टीकाकरण 4 से 6 महीने की उम्र में किया जाता है। इसके बाद यह वैक्सीन हर साल देनी पड़ती है।

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भारत में बकरी पालन की लागत

एक फार्म स्थापित करने की लागत इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी बकरियों के साथ फार्म शुरू करना चाहते हैं। यहां बकरियों की एक इकाई की कुल लागत का विवरण दिया जा रहा है।

  • आम तौर पर एक बकरी का वजन 25 किलो होता है। अत: 300 रुपये प्रति किलो की दर से एक बकरी का मूल्य 7,500 रुपये है।
  • इसी तरह एक 30 किलो बकरी की कुल कीमत 250 रुपये प्रति किलो की दर से 7,500 रुपये है।
  • एक इकाई में कुल 50 बकरियां और 2 बकरियां हैं। अत: एक इकाई बकरी खरीदने की कुल लागत होगी,
50 बकरियों की कुल कीमत रु.3,75,000
2 बकरियों की कुल कीमत 15,000 रुपये
एक इकाई की कुल लागत रु. 3,90,000

उसी तरह तुम मुर्गी पालन शुरू करें और खरगोश पालन व्यवसाय शुरू कर अच्छे मुनाफे को कम कर सकते हैं।

बकरी पालन के अन्य खर्चे:

  • आम तौर पर एक शेड के निर्माण की लागत 100 रुपये प्रति वर्ग फुट है। पानी, बिजली आदि के लिए सालाना 3000 रुपये तक खर्च किए जाते हैं। बकरियों की एक इकाई को खिलाने के लिए हर साल 20,000 रुपये की आवश्यकता होती है।
  • अगर आप बकरियों का बीमा कराना चाहते हैं तो इसके लिए कुल लागत का 5% खर्च करना होगा। उदाहरण के लिए, यदि बकरियों की एक इकाई की कुल लागत 3,90,000 रुपये है, तो इसका 5% बीमा के लिए यानि कुल 1,9500 रुपये खर्च करना होगा।
  • बकरियों की एक इकाई के लिए कुल वैक्सीन और चिकित्सा लागत 1,300 रुपये है।
  • इसके अलावा यदि आप काम करने के लिए मजदूरों को नियुक्त करते हैं तो आपको अलग से भुगतान करना होगा।
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1 साल के लिए कुल खर्च: उपरोक्त सभी खर्चों को जोड़कर एक वर्ष में बकरी पालन की कुल राशि 8 लाख रुपये हो जाती है।

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बकरियों को कौन सा चारा खिलाना चाहिए?

अब बात आती है बकरियों के खाने की ,जहां हम बात करेंगें की बकरियों को अच्छी सेहत के लिए खाने में क्या देना चाहिए।

  • बकरियों को खाने में अच्छा भूसा देना चाहिए और साथ मे बकरियों के दाने का प्रयोग करें।
  • बकरियों को दिन के समय खेत या फार्म पर घास खिलाने के लिए ले जाना चाहिए जिससे उन्हें हरी घास भी मिलेगी और उनके चलने से पैर और शरीर को मजबूती मिलेगी।
  • बकरियों के भोजन में हर रोज हरे चारे का प्रयोग उनके पाचन और स्वाथ्य को अच्छा करता है।
  • बकरियों को ज्यादा मात्रा में अनाज खिलाने से बचें।
  • अच्छे पाचन के लिए बकरियों के भोजन में पाचन चूर्ण का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
  • खाने के साथ बकरियों को आवश्यकता अनुसार पानी भी पिलाना भी जरूरी होता है।

बकरियों के प्रजजन का सही समय?

बकरियों को 15 से 18 माह की आयु में गर्भित करना ठीक होता है अच्छी देखभाल से इस आयु तक बकरियों का वजन 21 से 24 किलो के बीच हो जाता है कम वजन की बकरियों का गर्भित होना हानिकारक माना जाता है, इस वजह से गर्भित काल में बकरी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चों की मृत्यु की ज्यादा संभावना रहती है

बकरी जब गर्म होने लगे तो उसे 12 से 24 घंटे के भीतर बकरे के पास छोड़ देना चाहिए, जिससे बकरी को गर्भ धारण करने में आसानी होती है बकरियां 6 से 7 माह में बच्चे पैदा करती है और एक साथ बकरियां 2 से 3 बच्चे पैदा करती है

बकरियों का टीकाकरण (Goat Vaccination)

बकरियों को रोगमुक्त रखने के लिए उसे समय-समय पर टीकाकरण और डीवॉर्मिंग जरुर करवाते रहना चाहिए पैर और मुहं के रोग में (एफएमडी), गोट प्लेग के रोग (पीपीआर), हेमोरेगिक सेप्टिसेमिया (एचएस), एंथ्रेक्स, गोट पोक्स से संबंधित टीकाकरण और डीवोर्मिंग समय-समय पर कराते रहना चाहिए , जिससे बकरियां सामान्य रूप से अपना विकास कर पाए और हष्ट-पुष्ट रहे

बकरी पालन के लाभ (Benefits of Goat Farming in Hindi):

बकरी पालन के बहुत सारे लाभ होते हैं जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण लाभों की लिस्ट निम्नलिखित है ।

  • बकरी पालन के लिए कम खर्च और कम स्थान लगता है । यह व्यवसाय निश्चित आय पर निर्भर है । इसमें हानि की संभावना भी कम है ।
  • चूँकि बकरियां आकार में छोटी एवं स्वभाव में शांत होती हैं इसलिए घर की महिला सदस्य भी इनका पालन कर सकती है । इससे परिवार के श्रम का भी पूर्ण उपयोग होता है ।
  • सटीक सावधानी बरतने पर बकरियों की बीमारी भी अपेक्षाकृत कम होती है । निर्बल वर्ग हो या भूमिहीन, बकरी पालन इनकी आजीविका का मुख्य स्रोत होता है । यही कारण है की बकरी को ‘गरीब की गाय’ भी कहा जाता है ।
  • बकरियों को खुले चरगाहों में चरने के लिए भी ले जाया जा सकता है जिससे इनके पालन में बेहद कम खर्चा आता है। कहने का आशय यह है की जितने खर्चे में एक गाय या भैंस पाली जायेगी उतने खर्चे में तो चार पांच बकरियां पल जायेंगी इसलिए इसे हर वो व्यक्ति शुरू कर सकता है जिसके पास व्यापार करने के लिए ज्यादा पैसे नहीं हैं।
  • वस्तुतः बकरियों का पालन मांस के लिए ही अधिकतर किया जाता है । भारत में इनकी काफी मांग है । बाजार में बकरी के मांस की मांग व दाम भी बहुत है । इसका मांस खाने में स्वादिष्ट व पौष्टिक भी है । एक आंकड़े के मुताबिक भारत में उत्पादित कुल मांस का एक-तिहाई भाग बकरी के मांस का ही होता  है ।
  • दूध के उत्पादन के लिए भी बकरी पालन किया जाता है । भारत में जमुनापरी, बारबरी व बीटल नस्लों की बकरियां दुग्ध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं । भारत में कुल दुग्ध उत्पादन का 3% दूध बकरियों से प्राप्त होता है ।
  • बकरी का दूध आसानी से पचता है, यह रोगी व शिशुओं को भी दिया जा सकता है । गाय के दूध से कभी-कभी बच्चों को एलर्जी होती है । परंतु बकरी के दूध से एलर्जी होने की घटना काफी कम नजर आती है ।
  • बकरी के चमड़े का प्रयोग चमड़ा उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है । इससे कई चीजें तैयार की जाती हैं । जैसे- जूते, दस्ताने, जैकेट, फैन्सी बैग आदि । इसका चमड़ा निर्यात करके हमारे देश भारत को आर्थिक लाभ होता है । पश्चिम बंगाल के ‘ब्लैक बंगाल’ (काला बंगाल) नस्ल का चमड़ा विश्व विख्यात है ।
  • विभिन्न नस्लों के बकरियों के रेशें विभिन्न प्रकार के होते हैं । सामान्य बकरियों के रेशे से रस्सी, कम्बल आदि तैयार किए जाते हैं । अंगोरा नस्ल के बकरियों से प्राप्त मोहेर तथा चैगू और चैगंदे नस्लों से प्राप्त पश्मीना ऊन से उच्च कोटि के व कीमती ऊनी वस्त्र तैयार किया जाता है ये वस्त्र विदेशों में निर्यात भी किए जाते हैं ।
  • बकरी पालन से उत्पादित बकरी के मल-मूत्र को खाद के रूप में काम में लाया जा सकता है । इसमें उपलब्ध नाइट्रोजन, पोटाश और फास्फोरस जमीन की उर्वरता बनाए रखते हैं ।
  • बकरियों के छोटे आकार के कारण इनकी पशुशाला तैयार करने में कम जगह लगती है । और खर्च भी कम लगता है ।
  • बकरियों की रोग प्रतिरक्षा क्षमता अन्य पशुओं की अपेक्षा कई गुणा अधिक होती है । इसलिए इन्हें बीमारियाँ कम लगती हैं और मृत्यु दर कम रहती है।
  • इनके आहार प्रबंध करने में भी समस्या नहीं होती है । क्योंकि विस्तीर्ण प्रणाली अर्थात् अन्य पशुओं के साथ पाली जाने पर इनके भोजन पर अधिक खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है । सामान्यत: ये घास, बेल-पत्तियां, गाय-भैंस चरने के उपरांत रही-सही छोटे-छोटे घास, झाड़ियां, सब्जियों और फलों के छिलके या छाटन आदि खा लेती हैं। इसलिए  बकरी उद्योग में आमदनी (आय) सुनिश्चित करने हेतु बकरी पालन में वैज्ञानिक तरीके से आहार खिलाने, रोग प्रतिरोध की व्यवस्था अपनाने जैसे विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है ।
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इस व्यवसाय में हर महीने बंधा हुआ लाभ प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालांकि कई त्योहारों जैसे बकरीद, ईद आदि के मौके पर इन बकरियों की मांग काफी बढ़ जाती है। शुरुआती दौर में यह मुनाफा करीब 1.5 से 2 लाख रुपये सालाना है। यह मुनाफा हर साल बढ़ता है। बकरियाँ जितने अधिक बच्चे पैदा करती हैं, उन्हें उतना ही अधिक लाभ होता है।

बकरी पालन व्यवसाय के बारे में कुछ जरूरी जानकारी 

व्यवसाय का नाम  बकरी पालन
कैसे शुरू करें  बकरी पालन का व्यवसाय सरकारी योजनाओं के तहत ट्रेनिंग लेकर आप इस बिजनेस को शुरू कर सकते हैं या फिर स्वयं के पैसो से भी शुरू कर सकते हैं
लोकेशन  शहरी भीड़ भाड़ से दूर जहा पेड़ पौधें ज्यादा हो
बिजनेस में लगने वाली लागत  50 हजार रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक
प्रॉफिट  आपके निवेश के अनुसार
लोन सब्सिडी  सरकार बकरी पालन के लिए एक लाख रुपए के लोन के ऊपर जनरल कैटेगरी के लोगों को 25 परसेंट तक की सब्सिडी देती है।

जो लोग अनुसूचित जन जाति से संबंध रखते हैं उन्हें 35 पर्सेंट तक की सब्सिडी बकरी पालन लोन पर दिए जाने का प्रावधान है।

 

सरकार से समर्थन:

कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जाती हैं। हरियाणा सरकार ने भी शुरू की मुख्यमंत्री भेड़ पालक उत्थान योजना तो, आप पता लगा सकते हैं और अपने राज्य में चल रही ऐसी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा नाबार्ड से भी आपको आर्थिक मदद मिल सकती है. इसलिए नाबार्ड में आवेदन करके ऋण और सब्सिडी प्राप्त की जा सकती है।

पंजीकरण (Registration):

आपकी फर्म के पंजीकरण एमएसएमई या आप इसे उद्योग आधार की मदद से कर सकते हैं। यहां उद्योग आधार द्वारा फर्म के रजिस्ट्रेशन की जानकारी दी जा रही है।

  • आप उद्योग आधार के तहत ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। के लिए ऑनलाइन वेबसाइट udyogaadhar.gov.in है।
  • यहां आपको अपना आधार नंबर और नाम देना होगा।
  • अपना नाम और आधार नंबर डालने के बाद ‘Validate Aadhaar’ पर क्लिक करें। इस प्रक्रिया से आपका आधार मान्य हो जाता है।
  • इसके बाद आपको अपना नाम, कंपनी का नाम, कंपनी का पता, राज्य, जिला, पिन नंबर, मोबाइल नंबर, बिजनेस ई-मेल, बैंक डिटेल, एनआईसी कोड आदि देना होगा।
  • इसके बाद कैप्चा कोड डालकर सबमिट बटन पर क्लिक करें।
  • इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद आपको MSME द्वारा तैयार किया गया एक सर्टिफिकेट मिलता है। आप इस प्रमाण पत्र का एक प्रिंट ले सकते हैं और इसे अपने कार्यालय में रख सकते हैं।

मार्केटिंग (Marketing):

इस व्यापार को चलाने के लिए मार्केटिंग की आवश्यकता बहुत अधिक होती है. अतः आपको डेयरी फार्म से लेकर माँस के दुकानों तक अपना व्यापार पहुंचाना होता है. आप अपने बकरियों से प्राप्त दूध को विभिन्न डेयरी फार्म तक पहुँचा सकते हैं. इसके अलावा मांस की दुकानों में इन बकरियों को बेच कर अच्छा लाभ प्राप्त हो सकता है. भारत में एक बड़ी संख्या की आबादी मांस खाती है. अतः माँस के बाजार  में इसका व्यापार आसानी से हो सकता है.

निष्कर्ष:

तो दोस्तों ये थी आसान स्टेप जिससे की आप समझ गए होंगे की बकरी पालन व्यवसाय शुरू कैसे करें (How to Start Goat Farming Business in Hindi) यह बिजनेस आज के समय में काफी लोगों की पसंद बनता जा रहा है तथा इसमें होने वाला मुनाफा भी समय के साथ बढ़ता जा रहा है

इस बिजनेस को चलाने के लिए मार्केटिंग की बहुत जरूरत होती है। इसलिए आपको अपने व्यवसाय को डेयरी फार्म से लेकर मीट की दुकानों तक ले जाना होगा। आप अपनी बकरियों से मिलने वाले दूध को विभिन्न डेयरी फार्मों में ले जा सकते हैं। इसके अलावा इन बकरियों को मीट की दुकानों में बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। भारत में बड़ी संख्या में आबादी मांस खाती है। इसलिए मीट मार्केट में इसका आसानी से कारोबार किया जा सकता है।

FAQ About Goat Farming Business in Hindi 

कम खर्च में बकरी पालन कैसे करें?

बकरी पालन की लागत बकरियों के प्रकार, खेत के आकार और स्थान के आधार पर भिन्न होती है। हालांकि, कम खर्च में बकरी पालन करने के सुझाव यह है की सस्ते आवास और बाड़ का उपयोग करना, बकरियों को मुख्य रूप से घास और चरागाह खिलाना शामिल है।

गांव में बकरी पालन कैसे करें?

बकरी पालन आमतौर पर गांव में ज्यादा किया जाता है बकरी पालन लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उनके दूध, मांस और रेशे के लिए गांव में पालन किया जाता है बकरियां दूध, मांस और फाइबर का एक अच्छा स्रोत हैं । बकरियों को छोटे-छोटे झुण्डों में रखा जाता है और उन्हें ताजे पानी, घास, अनाज, खनिज और विटामिन का संतुलित आहार खिलाया जाता है।

बकरी पालन व्यवसाय के लिए लोन कैसे मिलेगा?

बेरोजगारी को दूर करने के लिए बकरी पालन को एक अच्छा व्यवसाय माना गया है जिसे स्त्रियां भी घर के काम काज के साथ ही साथ बड़ी ही आसानी से कर सकती है। यदि आप भी बकरी पालन के इच्छुक है और आप के पास पर्याप्त राशि नही है तो चिंता की कोई भी बात नही है क्योंकि भारत सरकार बकरी पालन के लिए लोन भी प्रदान करती है

कितने बकरियों से इस बिजनेस को शुरू किया जा सकता है?

4 से 5 बकरियों से बकरी पालन का व्यवसाय किया जा सकता है

10 बकरी पालने में कितना खर्चा आएगा?

10 बकरी पालने में आपका खर्चा एक साल में 25 से 30 हजार तक हो सकता है

बकरी पालन के लिए कितना पैसा चाहिए?

अगर आप बकरी पालन छोटे पैमाने में करते है तो आप 25 से 30 हजार खर्च करके भी बकरी पालन कर सकते हैं अगर आप इसे बड़े पैमाने पर करना चाहते है तो इसके लिए कम से 2 से 3 लाख तक का खर्च आ सकता है।

बकरी पालन से कितना फायदा होता है?

बकरी पालन व्यवसाय में फायदे की बात करें तो आप जितना इस व्यवसाय में लागत लगाते है उनसे काफी अधिक कमाई होती है क्युकि एक बकरे की कीमत उनके वजन के हिसाब से 12 से 15 हजार रुपये तक की होती है

बकरी की आयु कितनी होती है?

एक बकरी की आयु काम से काम 10 से 12 साल यह इससे भी ज्यादा हो सकती है

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